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लंबे समय के प्रतिबंध के बाद भारत ने गेहूं निर्यात के द्वार खोले, अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए रास्ता साफ

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं के निर्यात पर लगी रोक को आंशिक रूप से हटाने की घोषणा की। सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं और इसके अतिरिक्त 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को अनुमति दे दी है। यह फैसला मई 2022 में लगाए गए पूर्ण निर्यात प्रतिबंध के बाद लिया गया है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय घरेलू बाजार में उपलब्धता और कीमतों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम किसानों को बेहतर दाम दिलाने और बाजार में संतुलन बनाए रखने की दिशा में “निर्णायक और किसान-हितैषी” पहल है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं और उपलब्धता भी संतोषजनक है। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्यात खोलने का फैसला किया गया है। इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना सोमवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी की जाएगी।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के दौरान निजी क्षेत्र के पास गेहूं का स्टॉक करीब 75 LMT है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 32 LMT अधिक है। यह देश में मजबूत आपूर्ति स्थिति को दर्शाता है।

इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के केंद्रीय भंडार में कुल गेहूं उपलब्धता करीब 182 LMT रहने का अनुमान है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि निर्यात की अनुमति से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि भारत ने 13 मई 2022 को गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी और इसे “फ्री” श्रेणी से हटाकर “प्रतिबंधित” श्रेणी में डाल दिया गया था। अब तीन साल बाद सरकार के इस फैसले से न केवल किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की वापसी का रास्ता भी साफ हो गया है।

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