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गेहूं निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला: 50 लाख टन तक बढ़ी सीमा, वैश्विक बाजार में भारत मजबूत

निर्यात की अनुमति देने का आधिकारिक ऐलान किया है। यह निर्णय देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार और आने वाले समय में बेहतर फसल की संभावना को देखते हुए लिया गया है।

20 अप्रैल को केंद्र सरकार ने संकेत दिया था कि मजबूत उत्पादन और संतोषजनक स्टॉक की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त निर्यात की अनुमति दी जाएगी। इस फैसले के बाद अब कुल मिलाकर 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी मिल चुकी है।

DGFT द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, गेहूं की सामान्य निर्यात नीति अभी भी प्रतिबंधित बनी हुई है। हालांकि, विशेष अनुमति के तहत अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं निर्यात की छूट दी गई है। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

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अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 13 मई 2022 की मौजूदा नीति की शर्तें लागू रहेंगी। इसके तहत, भारत सरकार अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उनके अनुरोध पर इस निर्धारित सीमा से अतिरिक्त गेहूं निर्यात की अनुमति भी दे सकती है।

कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए देश का गेहूं उत्पादन 120.2 मिलियन टन रहने का अनुमान है। उत्पादन में यह वृद्धि मुख्य रूप से गेहूं की बुवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी के कारण हुई है, जो 2026 के रबी सीजन में 33.41 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 32.80 मिलियन हेक्टेयर थी।

इससे पहले, जनवरी में सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। इसके बाद फरवरी में 5 लाख टन अतिरिक्त गेहूं उत्पादों और 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी गई थी।

इस नए फैसले से भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में देश की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।

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